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दुबई की फुजिरा जेल में बंद कल्याणपुर का युवक, रिहाई के लिए परिवार ने लगाई गुहार

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समस्तीपुर के कल्याणपुर प्रखंड के युवक मो. उजाला दुबई की फुजिरा जेल में 8 महीनों से बंद है। परिजनों ने रिहाई के लिए पूर्व मुख्य सचेतक अख्तरुल इस्लाम शाहीन से मदद की गुहार लगाई।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर प्रखंड से जुड़ा एक मार्मिक मामला सामने आया है, जहां एक गरीब परिवार अपने बेटे की रिहाई के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। भागीरथपुर गांव के रहने वाले 28 वर्षीय मो. उजाला पिछले आठ महीनों से दुबई के फुजिरा जेल में बंद हैं। उन पर ड्रग्स सप्लाई से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, लेकिन परिवार का दावा है कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजा गया था।

इस पूरे मामले ने न सिर्फ एक परिवार को संकट में डाल दिया है, बल्कि विदेश में रोजगार के नाम पर होने वाली ठगी और शोषण की हकीकत को भी उजागर कर दिया है। युवक की मां रिजवाना खातून और पत्नी रोजी परवीन ने अपने बेटे और पति की रिहाई के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है।

 नेता से लगाई गुहार, न्याय की उम्मीद

परिजनों ने हाल ही में बिहार विधान सभा के पूर्व मुख्य सचेतक अख्तरुल इस्लाम शाहीन से मुलाकात की और पूरे मामले से अवगत कराया। इस मुलाकात के दौरान परिवार के लोगों की पीड़ा साफ झलक रही थी। मां और पत्नी ने भावुक होकर बताया कि उजाला को बेहतर नौकरी का सपना दिखाकर विदेश भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचते ही वह मुसीबतों में फंस गया।

अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यदि सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं, तो वे इस मामले को विदेश मंत्रालय तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकारी स्तर पर पहल कर युवक की सुरक्षित रिहाई के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

 कैसे फंसा विदेश में?

परिवार के अनुसार, मो. उजाला को एक एजेंट ने विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के लिए यह एक सुनहरा मौका लगा। बेहतर भविष्य की उम्मीद में उजाला दुबई चला गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं।

बताया जा रहा है कि कुछ ही समय बाद उस पर ड्रग्स सप्लाई से जुड़े आरोप लगा दिए गए और उसे गिरफ्तार कर फुजिरा जेल भेज दिया गया। परिवार का कहना है कि उजाला को इस मामले में फंसाया गया है और उसे साजिश के तहत आरोपी बनाया गया है।

 8 महीने से जेल में, परिवार बेहाल

पिछले आठ महीनों से उजाला जेल में बंद है और इस दौरान परिवार लगातार उसकी रिहाई के लिए प्रयास कर रहा है। लेकिन सीमित संसाधनों और जानकारी के अभाव में उन्हें अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है।

मां रिजवाना खातून का कहना है कि उनका बेटा मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाने वाला सीधा-सादा युवक है। उन्होंने रोते हुए कहा कि उनके बेटे को झूठे मामले में फंसाया गया है और उसे जल्द से जल्द रिहा किया जाना चाहिए। वहीं पत्नी रोजी परवीन ने कहा कि उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और पति के बिना घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।

 सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं की मौजूदगी

इस दौरान कई स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने परिवार को समर्थन देने की बात कही। एथलेटिक्स संघ के जिलाध्यक्ष मो. रजीउल इस्लाम रिज्जू उर्फ बाबा, राजद प्रवक्ता राकेश कुमार ठाकुर, राजद महासचिव मो. परवेज आलम और नगर अध्यक्ष उमेश प्रसाद यादव ने भी इस मुद्दे को उठाने और हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।

 विदेश में फंस रहे मजदूर, बड़ा सवाल

यह मामला एक बार फिर उस गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है, जिसमें बिहार समेत देश के कई राज्यों के युवक बेहतर रोजगार की तलाश में विदेश जाते हैं और वहां धोखाधड़ी या कानूनी पचड़ों में फंस जाते हैं। एजेंटों के झूठे वादों और अधूरी जानकारी के कारण कई परिवारों की जिंदगी बर्बाद हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी रखनी चाहिए और विदेश भेजने वाले एजेंटों की जांच-पड़ताल को और मजबूत करना चाहिए। साथ ही, विदेश जाने वाले युवाओं को भी पूरी जानकारी और कानूनी प्रक्रिया समझकर ही कदम उठाना चाहिए।

अब क्या आगे?

फिलहाल परिवार को उम्मीद है कि जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में तेजी आएगी और विदेश मंत्रालय के माध्यम से युवक की रिहाई का रास्ता निकलेगा। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक गरीब परिवारों के युवक इस तरह के जाल में फंसते रहेंगे?

यह घटना न सिर्फ एक परिवार की पीड़ा है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी भी है कि विदेश रोजगार के नाम पर हो रही ठगी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

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